कल टीचर्स डे है। अनन्त अपने घर में है। बहुत सोच रहा है कि कल टीचर के लिए क्या लेकर जाऊँ। घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं है और उसके मम्मी-पापा जो भी वो चाहे वो दिला सकते हैं। कुर्सी पर बैठा-बैठा सोच रहा है। एक कार्ड बनाकर ले जाऊँ, कोई फूलों का गुलदस्ता दूँ, पेन बॉक्स लेकर जाऊँ? पर उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा। उसे अपनी टीचर से बहुत लगाव है। इसीलिए उसे सब चीजें बहुत छोटी लग रही हैं। फिर कुछ सोचकर उठा।

मम्मी से जाकर बोला “मम्मी खीर बनानी है।” मम्मी ने आश्चर्य से पूछा, “तुझे खीर बनानी है? इतना सा तो है अभी तू! तुझे खानी है तो मैं बना दूँगी। जा जाकर पापा के पास बैठ, मैं बना देती हूँ।” अनन्त बोला, “नहीं मम्मी, मुझे बनानी है। आप बस मेरी मदद कर दो। मुझे सिखा दो।” मम्मी ने कहा, “पर बेटा, तुझे जरूरत क्या है खीर बनाने की?” अनन्त ने भोलेपन से कहा, “मम्मी, कल टीचर्स डे है न, मुझे मेरी टीचर के लिए खीर लेकर जानी है। उन्हें खीर बहुत पसन्द है।” मम्मी इस इतने से बच्चे के मासूम से चेहरे और भावों की ओर देखती रह गयी। और भरी आँखों से सिर हिलाकर उसे कह दिया, “अच्छा ठीक है, बना। चल मैं बनवा देती हूँ।”

और मम्मी ने उसकी मदद करते हुए खीर बनवा दी। फिर अनन्त बोला, “मम्मी एक बार चखकर देख लूँ कैसी बनी है?” मम्मी ने कहा, “देख ले।” उसने चखकर देखी तो उसे अच्छी लगी। फिर वो खीर को फ्रिज में रखकर निश्चिन्त होकर सो गया। मम्मी पापा के पास जाकर सब बताने लगी। उसके पापा भी सब जानकर खुश हुए। मम्मी-पापा ने भी जब खीर चखी तो आज उसका स्वाद अलग ही लगा।

अगले दिन वो स्कूल आया तो एक डिब्बे में हाथ में पकड़कर खीर लाया। उसे डर था कि कहीं फ़ैल ना जाये। सब उसे देखकर चिढ़ाने लगे कि तू ये डब्बा लाया है टीचर के लिए। वो कुछ नहीं बोला। फिर टीचर के आने पर सब अपने-अपने उपहार देने लगे। कोई सुन्दर कार्ड खरीदकर लाया था, कोई मिठाई लाया था, कोई गुलदस्ता लाया था, कोई गुलाब का फूल लाया था, कोई परफ्यूम लाया था। अनन्त को ये सब देखकर बहुत अजीब सा लग रहा था। उसे दुःख सा हो रहा था कि वो तो कुछ अच्छा सा लाया ही नहीं। उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि वो टीचर के पास जाये और ये दे।

अनन्त डर रहा था कि सब हँसेंगे और टीचर को भी बुरा लगेगा। उसे खुद भी बुरा लग रहा था पर अब क्या करे। आखिर उसे जब टीचर ने बुलाया तो वह डरता हुआ गया और सिर नीचा किये हुए वो डब्बा टीचर को दे दिया। कुछ बोल नहीं पाया। पर दुःख के कारण उसके आँसू निकल आये। टीचर ने पूछा, “क्या हुआ अनन्त?” अन्नत आँसू पोंछकर बोला, “मुझे माफ़ कर देना टीचर। मैं कुछ अच्छा नहीं ला पाया। मैं बस खीर बनाकर लाया हूँ। लेकिन मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।” टीचर की आँखें भी उसका इतना प्यार देखकर भर आयीं। उन्होंने उसी समय डब्बा खोलकर खीर खायी और कहा, “इतनी अच्छी खीर मैंने जीवन में कभी नहीं खायी!” सब बच्चों को भी थोड़ी-थोड़ी खीर दी। टीचर के साथ सबने तालियाँ बजाकर उसे धन्यवाद दिया।

शब्दार्थ

  • भाव – ख़याल
  • लगाव – प्यार
  • निश्चिन्त – चिंता के बिना
चीज नहीं भाव बड़ा होता है
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