बाहर खेलना शरीर के लिए व्यायाम जैसा होता है। चीकू ने यही सीखा।

छह वर्षीय चीकू हमेशा मोबाइल पर गेम्स खेलता और टीवी देखता। बाकी दोस्तों की तरह पार्क में जाकर खेलना उसे पसंद नहीं था। स्कूल से लौट कर वह सोफ़े पर बैठा टीवी देखता या फिर मोबाइल पर गेम्स खेलता।

उसके मम्मी-पापा परेशान थे। उनके बेटे को पता ही नहीं था कि बाहर खुली हवा में खेलना कितना अच्छा लगता है। दोस्तों के साथ झूला झूलना, दौड़ना, पकड़ा-पकड़ी खेलना – सब कुछ बहुत ही मज़ेदार होता है। खुले वातावरण में खेलना व्यायाम के बराबर होता है। बाहर के ऐसे खेलों से सेहत बनी रहती है। उससे मन भी अच्छा रहता है।

Cheeku ne seekha khelna

चीकू को यह एहसास दिलाना ज़रूरी था। उसके दोस्तों और मम्मी-पापा ने मिलकर एक प्लान बनाया। एक शाम उसके दोस्त एक बगल वाले पड़ोसी के लॉन में खेलने पहुंचे। वह आँख-मिचौली खेलने लगे और खूब मज़े लेने लेगे। चीकू टीवी देख रहा था। लेकिन उसका ध्यान कई बार हटकर दोस्तों के शोरगुल की तरफ जाता रहा। वह बार-बार खिड़की पर आकर उनका खेल देखता रहता। उसके दोस्तों ने भी उसे देखा और उसे बुलाने लगे। उसे भी खेलने की इच्छा हुई। दोस्तों के पुकारने पर उससे और रुका ना गया। वह तुरंत खेलने पहुँच गया।

उस दिन उसने कुछ नया सीखा। सबके साथ बाहर खुली हवा में खेलने का मज़ा अलग ही होता है।

शब्दार्थ:

  • वर्षीय – साल का
  • वातावरण – आस पास का परिवेश
  • व्यायाम – शरीर को स्वस्थ रखने की शारीरिक कसरत

नैतिक मूल्य:

  • सेहत

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