First published in January 2017 edition


कार्यक्रम में जाने के लिए तैयार होना था और तनीषा बहुत उत्सुक थी अपनी पसंदीदा गुलाबी फ्रॉक पहनने को। माँ ने उसे कई बार वह पहनने को मना किया है क्योंकि अब वह बहुत पुरानी हो गई थी। पर तनीषा जहाँ भी जाती उसी को पहनती। वह फ्रॉक उसे उसके पापा ने भेंट की थी और उसे उस फ्रॉक से बेहद लगाव है। माँ ने तनीषा को पुकार लगाई, “जल्दी चलो, हमें देर हो रही है”। तनीषा जा ही रही थी कि दरवाज़े में उसकी फ्रॉक अटक गई। जब उसने उसे निकालना चाहा तो वह फ्रॉक फट गई। तनीषा ने ज़ोर-ज़ोर से रोना शुरू कर दिया। माँ ने जब उसका रोना सुना तो पूछा, “क्या हुआ, क्यों रो रही हो?” तनीषा ने उनसे पूरी घटना का वर्णन किया तो माँ ने कहा, “इतनी सी बात के लिए इतना रोना? एक फ्रॉक के लिए तुम अपना दिन क्यों खराब कर रही हो? हमें कभी भी किसी भी वस्तु से इतना लगाव नहीं रखना चाहिए कि जब वह हमारे पास न हो तब हमें बहुत बुरा लगे। इस दुनिया में कोई भी चीज़ हमेशा के लिए नहीं रहती। तो इसलिए अब मत रो क्योंकि जब पुरानी चीज़ जाएगी तभी तो नई चीज़ के लिए जगह बनेगी। तुम अपनी नीली वाली फ्रॉक जल्दी से पहन लो”। तनीषा ने माँ की बात समझकर दूसरी फ्रॉक पहन ली लेकिन इस वादे पर कि वह उसे सिल देंगी। तनीषा ने वह नीली फ्रॉक पहन तो ली पर मन में उसे बहुत बुरा भी लग रहा था।

khushi ka uphaar

अगले दिन, जब काम वाली आंटी अपनी बेटी रानी के साथ आयी, तो तनीषा रानी के साथ खेलने लगी। माँ ने आंटी को तनीषा की फ्रॉक सिलने को दे दी। आंटी ने वह फ्रॉक सिल दी। रानी ने जब उस फ्रॉक को देखा तो उसे वह बेहद अच्छी लगी और फ्रॉक को देखते ही बोली, “वाह! यह फ्रॉक कितनी सुन्दर है”। तनीषा को लगा कि उसके पास तो वैसे भी बहुत सारे कपड़े है। यह सोचकर उसने वह फ्रॉक रानी को देदी। जब तनीषा उसे वह फ्रॉक दे रही थी तब उसे बुरा तो लगा मगर फिर यह सोचकर संतोष मिला की इससे वह किसी को खुशी दे पाएगी।

कुछ दिन बाद तनीषा के घर पर एक कार्यक्रम था, उसमें माँ ने काम वाली आंटी को उनकी मदद करने के लिए बुलाया। रानी भी आंटी के साथ आयी। वह वही गुलाबी फ्रॉक पहन कर खुश होकर इधर उधर घूम रही थी। उसे उस फ्रॉक में खुश देखकर तनीषा को बहुत प्रसन्न्ता हुई कि वह किसी को खुशी दे पायी है। माँ ने भी तनीषा को इसके लिए शाबाशी दी। उन्हें भी तनीषा की दिलेरी पर गर्व हो रहा था।

शब्द अर्थ:

  • वर्णन – विस्तार में समझाना
  • संतोष – तस्सल्ली
  • दिलेरी – उदारता
Background music: Wake Up! (Kai Engel) / CC BY 4.0
खुशी का उपहार
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