रोज सुबह उठकर जिस मूर्ति को पूजा की तरह स्मारक तराशता रहा है, आज उसी मूर्ति पर वह अश्रु बहा रहा है। सोलह साल की कठोर तपस्या के बाद उसने यह मूर्ति बनायी है, आज वह बनकर तैयार हुई है।…

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किसकी मूर्ति है वह?
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