First published in March 2016

एक लड़की थी। उसका नाम ऋतु था। उसे चींटियाँ बहुत अच्छी लगती थीं। वह सोचती थी कि चींटी का जीवन उससे ज्यादा अच्छा है। अगर वह चींटी होगी तो उसे न ही पढ़ाई करनी पड़ेगी और न ही स्कूल जाना पड़ेगा। इस वजह से वह परेशान रहती थी। उसकी मम्मी ने उसे समझाया भी कि ऐसा नहीं होता कि चींटियों का जीवन बहुत आसान हो, लेकिन ऋतु कहाँ समझने वाली थी।

एक दिन ऋतु बिस्तर पर बैठी थी। उसने बिस्तर पर जगह करने के लिए तकिया हटाया तो उसे एक डौल (गुड़िया) दिखी जिसने परी वाले कपड़े पहन रखे थे। वो डौल ऋतु की नहीं थी लेकिन उसने आज तक इतनी सुंदर डौल नहीं देखी थी। उस डौल के हाथ मे एक छोटी सी छड़ी थी। ऋतु ने उस छड़ी को छुआ और एकदम से कुछ हुआ! ऋतु बेहोश हो गयी।

उसकी आँखें जब खुलीं तो उसने देखा कि घर की सारी चीज़ें कई गुना बड़ी हो गयी थीं। फिर ऋतु ने देखा वह चींटी में बदल चुकी है । यह देख के वह खुशी से झूम उठी। आखिर खुश होगी भी क्यूँ नहीं, उसका तो सपना पूरा हो गया था । तभी कुछ चींटियों को उसने एक पंक्ति में जाते हुये देखा। उसने उनसे दोस्ती करने की सोची। फिर उसने देखा कि वे चीटियाँ नाली पर चलती हुई जा रहीं थीं। नन्ही ऋतु बहुत सफाई-पसंद थी। उन्हें नाली पर चलते देख उसने उनके पास जाने का प्लान ही बदल दिया।

ऋतु को अब लगा कि ये सब छोड़ के वह कुछ अच्छा सा खा ले तो बेहतर होगा। नन्ही ऋतु ने फिर आदत अनुसार अपनी मम्मी को आवाज़ लगाने की सोची, लेकिन फिर उसे याद आया कि अब उसे खाना खुद ही ढूँढना है। उसे अपने सामने एक छोटा सा केक का गिरा हुआ टुकड़ा दिखा, जो कुछ घंटों पहले उसी से खाते वक्त गिर गया था। वह जैसे ही टुकड़ा उठाने के लिए चलने लगी उतने में ही उसके सामने एक चींटियों का झुंड आया और वे टुकड़ा उठा के ले जाने लगे। बेचारी ऋतु वहाँ खड़े सब कुछ देख रही थी बस। वह खड़ी ही थी, इतने में उसे उसके ऊपर एक बहुत ही बड़ी चप्पल दिखी। किसी तरीके से वह उस चप्पल के कुचले जाने से बच के घर से बाहर आ गयी।

अब ऋतु वापस बड़ी होना चाहती थी। अपनी मम्मी से गले मिलना चाहती थी। अपनी खुशियों से भरी दुनिया में वापस आना चाहती थी लेकिन ऋतु के लिए अभी शायद मुसीबतें खत्म नहीं हुईं थीं। बाहर जहाँ वह इतनी मुश्किल से पहुंची थी वहाँ बारिश हो रही थी! ऋतु डूबने लगी। अब उसने ज़िंदा रहने की उम्मीद छोड़ दी थी। ऋतु बहुत ज़ोर से चिल्लाई…

एकदम से मम्मी का चेहरा उसे अपने सामने दिखा। उसने बिना कुछ सोचे-समझे मम्मी को गले लगा लिया। उसका चेहरा देख के मम्मी समझ गईं कि उसने कोई बुरा सपना देखा है। उसकी मम्मी ने उसके बालों मे हाथ फेरते हुये उससे कहा कि तुम्हारे साथ कुछ नहीं हुआ है, सब ठीक है। तब ऋतु की जान में जान आयी। अब ऋतु बहुत अच्छे से समझ गयी थी कि हर जीव-जन्तु के जीवन में अपने-अपने हिस्से की परेशानियाँ हैं। इसके बाद ऋतु ने कभी कोई बेकार की इच्छा नहीं की।

शब्दार्थ

  • पंक्ति – एक ही सीध में
  • परेशानियाँ – मुसीबतें
काश
Average rating of 5 from 3 votes

Leave a Reply

Loading...