Post Series: सिंहासन बत्तीसी

नौंवे दिन राजा भोज स्नानादि से निवृत होकर पुन: सिंहासन पर आरूढ़ होने की लालसा मन में लेकर दरबार में पहुंचे। किन्तु जैसे ही वे सिंहासन के निकट पहुंचे, मधुमालती नामक पुतली प्रकट हुई और उन्हें रोकते हुई बोली, “ठहरो!…

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कहानी पुतली मधुमालती की
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