दादी माँ ने वैकुण्ठ को अपने बचपन के किस्से सुनाये, जो आज के बचपन से बहुत अलग थे। “दादी माँ आप मुझसे रोज मेरे बचपन की बातें सुनते हो, आज अपने बचपन की बातें बताओ”, वैकुण्ठ ने मचलते हुए कहा।…

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कल और आज का बचपन
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