First published in November 2016 edition.


कक्षा चार में पढ़ने वाला, तक़रीबन ९ साल का सोनू, एक अच्छे घर से ताल्लुक़ रखता था। कुछ दिनों से न जाने कैसे उसे पतंग लूटने की एक बुरी आदत पड़ गयी थी। वह स्कूल से छुट्टी के बाद घर आता और फिर मैदान में खेलने का बहाना कर पतंग लूटने निकल जाता।

आसमान में उड़ती पतंगों को जब आपस में लड़ाया जाता तो उनमें से कुछ पतंगें कट कर ज़मीन पर आ गिरतीं। उन कटी पतंगों को लूटने के लिये सोनू सड़क पर खेलने वाले बच्चों के साथ बेतहाशा दौड़ते हुए उन्हें पकड़ने की कोशिश करता। ऐसे में दौड़ते हुए बच्चों की नज़र कटी पतंग की तरफ़ रहती थी जो आसमान से ज़मीन की तरफ गिर रही होती थी। कभी पतंग के पीछे भागते-भागते बच्चे सड़क पर भी आ जाते। ऐसी स्थिति में  हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता।

पतंग लूटने की इस बुरी आदत का सोनू के घरवालों को बिल्कुल नहीं पता था। वो लूटी हुई पतंगों को चुपके से अपने घर में बने गैराज के एक कोने में छुपा देता था। एक बार पतंग लूटने के चक्कर में भागता हुआ सोनू सड़क पर गिर गया। वो तो ग़नीमत थी कि उस समय सड़क पर कोई वाहन नहीं गुज़र रहा था। नहीं तो भयानक दुर्घटना हो सकती थी। सड़क पर गिरने से उसके दोनों घुटने छिल गये। जब घरवालों ने उससे पूछा कि ये चोट कैसे लगी तो वह बोला कि मैदान में फुटबॉल खेलते हुए गिर गया था, उसी कारण ये चोट लग गयी।

kati patang

एक बार पतंग के पीछे भागता हुआ सोनू एक गली में घुसा। उसकी नज़र आसमान की तरफ़ कटी पतंग पर थी। उसी गली में सामने से एक ११-१२ साल का लड़का साईकल से आ रहा था। उसकी साईकल के कैरियर पर अन्डे की कुछ ट्रे लदी हुई थीं। बेतहाशा भागता हुआ सोनू धड़ाम से उस साईकल वाले लड़के से टकराया। सोनू, साईकल और साईकल वाला लड़का, तीनों ज़मीन पर आ गिरे। चोट तो किसी को कोई खास नहीं लगी पर साईकल पर लदी ट्रे में रखे अधिकांश अन्डे फूट गये।

फूटे अन्डो को देखते ही साईकल वाला लड़का जोर-जोर से रोने लगा। उसने सोनू से कहा, “मैं बहुत ग़रीब हूँ, अगर ये अन्डे मैने मालिक को नहीं पहुँचाये तो वो मुझे बहुत मारेगा और मेरे पैसे भी काट लेगा। तुम्हारी गल्ती से ये अन्डे टूटे हैं, मुझे इनके पैसे दो”। उस लड़के ने सोनू का हाथ कस के पकड़ रखा था जो सोनू छुड़ा नहीं पा रहा था।

सोनू में पतंग लूटने की गलत आदत तो पड़ गयी थी पर वो दिल का बहुत भला था। उसने उस लड़के से कहा, “तुम मेरा हाथ छोड़ो, मैं भागूँगा नहीं। पहले हम साबुत अन्डे इकट्ठा करते हैं, फिर तुम मेरे साथ मेरे घर चलो, वहाँ मैं तुम्हें पैसे दिलवाऊँगा”।

पहले तो उस लड़के को सोनू की बातों पर विश्वास नहीं हुआ। पर जब सोनू ने बार-बार ये बात कही तो उस लड़के ने सोनू का हाथ छोड़ दिया।

उसके बाद वो दोनों सोनू के घर आये। घर पहुँच कर सोनू ने रोते-रोते सारी बातें अपनी मम्मी को बताईं। पतंग लूटने की आदत का पता चलते ही मम्मी तो भौचक्की रह गयीं।

सोनू ने कहा, “मम्मी मुझे माफ़ कर दो, मैं आइंदा से ऐसी ग़लती कभी नहीं करूँगा। और हाँ इस ग़रीब लड़के के फूटे अंडों के पैसे दे दीजिये। वो पैसे आप मेरे हर महीने के जेब ख़र्च (पॉकेट-मनी) से काट लेना”।

मम्मी ने मोबाईल फोन से सारी बातें सोनू के पापा को बताईं। और कहा सोनू अपनी गल्ती पर बहुत शर्मिंदा है और बार-बार माँफी माँग रहा है। सोनू के पापा ने पूछा उस लड़के का क़रीब कितने रूपयों का नुकसान हुआ है? वो लड़का ५०० रूपये माँग रहा है, सोनू की मम्मी बोलीं। सोनू के पापा ने कहा, उसे ५०० रूपये दे दो और ५० रूपये और दो। जिससे वो थोड़ा खुश हो जायेगा।

५०० रूपये के अलावा ५० रूपये ऊपर से मिलने पर उस लड़के के चेहरे पर एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी। उसने सोनू की मम्मी के पैर छूकर उनसे विदा ली।

सोनू रात में बहुत घबराया हुआ था कि पापा आकर मेरी बहुत पिटाई करेंगें। पर पापा ने उसकी बिल्कुल पिटाई नहीं करी। मगर उसे अच्छी तरह समझाया कि आसमान की तरफ देखते हुए दौड़ने पर तो कहीं भी चोट खा सकते हो, किसी गड्ढे में गिर सकते हो, किसी गाड़ी से टकरा सकते हो। और कोई ये सुने की राजीव वर्मा जैसे बड़े व्यापारी का लड़का सोनू वर्मा सड़क पर खेलने वाले लड़कों के साथ पतंग लूटता फिरता है तो कितने शर्म की बात है ।

सोनू ने अपने कान पकड़ कर पापा से माफ़ी माँगी और कहा आइंदा मैं ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा।

शब्दार्थ

  • बेतहाशा – बिन सोचे-समझे
  • अधिकांश – ज़्यादातर
  • भौचक्की – हैरान
कटी पतंग
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