मंजू आंटी और मम्मी बहुत अच्छी सहेलियाँ हैं। उनकी बेटी नेहा और मैं साथ में ही पढ़ते है। मैं जब भी बैडमिंटन खेलती, नेहा मुझे दूर से देखा करती, पर कभी खेलती नहीं थी। बहुत पूछने पर वह बताती है कि उसकी मम्मी कहती है कि खेलकूद लड़कियों का काम नहीं है।

घर आकर यह बात मैंने मम्मी को बतायी। फिर मम्मी ने आंटी, नेहा और मुझे एक साथ बैठा कर कहा कि आजकल लड़कियाँ किसी से कम नहीं है। हर क्षेत्र में आगे जा रही हैं। अब साक्षी मलिक को ही ले लीजिये, उनको ओलंपिक में कांस्य पदक मिला। और पता है वह भी कुश्ती में, जिसे लड़कों का खेल माना जाता है! साक्षी मलिक के पापा कंडक्टर और माँ आँगनबाड़ी में नौकरी करते थे। इसलिये उन्होंने अपना बचपन दादा-दादी के साथ बिताया। उनके दादाजी हरियाणा के जाने-माने पहलवान यानि कि कुश्ती खेलते थे। यह देखकर साक्षी ने बचपन से ही कुश्ती खेल को अपनाने का मन बना लिया था। जब घर वालों को बताया तो सभी ने मना किया पर साक्षी के इरादे पक्के थे। अत: सभी को उनकी बात माननी पड़ी। फिर क्या, १२ साल की उम्र से उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गयी।

Ubharte khiladi

कांस्य पदक जीतने के बाद उन्हें कई इनाम देने की घोषणा हुई, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं – हरियाणा सरकार ने २.५ करोड़, दिल्ली सरकार ने १ करोड़ रुपए, रेलवे ने ५० लाख, भारतीय ओलम्पिक संघ ने २० लाख, जेएसडब्ल्यू ने १५ लाख एवं सलमान खान ने १ लाख एक हज़ार के पुरस्कार दिये है।

इसके अलावा हमारे देश की और भी महिलाओं ने भारत का नाम ऊँचा किया है। भारत सरकार की तरफ से इन सभी को पुरस्कार दिये गये हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार है:

  • पी टी ऊषा – दौड़
  • बंछेद्री पाल – माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला
  • सानिया मिर्ज़ा – टेनिस
  • सायना नेहिवाल – बैडमिंटन
  • मैरी कॉम – बॉक्सिंग
  • पी वी संधू – बैडमिंटन
  • दीपा करमरकर – जिमनास्टिक

मम्मी के समझाने पर मंजू आंटी को समझ आ चुका था कि लड़कियाँ भी किसी से कम नहीं है। इस वजह से मुझे अपने साथ खेलने के लिये नयी साथी नेहा मिल चुकी है। अब नेहा और मैं रोज़ बैडमिंटन खेलते हैं।

शब्द-अर्थ:

  • आँगनबाडी – ग़रीब बच्चों के लिये स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पोषण में मदद करने वाली संस्था
  • घोषणा करना – सभी को बताना
उभरते खिलाड़ी
Rate this post

Leave a Reply

Loading...