सिमरन की दादी बहुत सफाई पसन्द महिला थीं। उनके कमरे में हर चीज बड़े ही कायदे से रखी होती थी। इनमें से एक था दादी की अल्मारी के ऊपर रखा सूटकेस। एक बार सिमरन ने दादी से पूछा, “इस सूटकेस में क्या है दादी?”

दादी ने बताया, “इसमें तुम्हारे दादा जी का कुछ सामान व पुरानी चीज़ें हैं।”

एक दिन रविवार को सिमरन परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह बहुत थक गयी थी और उसे लग रहा था कि इस बार वह अच्छे नंबर नहीं ला पायेगी। परेशान सी होकर वह दादी के कमरे में आयी। उसकी नजर उसी सूटकेस पर गयी, तब उसने दादी से पूछा कि क्या वह उस सूटकेस को देख सकती है? दादी ने कहा, “जरूर बेटा, क्यों नहीं!”

Aashirwaad

तब स्टूल पर चढ़कर सिमरन ने सूटकेस को ध्यान से उतारा। उसमें दादा जी के कुछ पुराने कपड़े व फोटो थे। उसने सभी फोटो बड़े ही मन से देखे। वे सब ही अच्छे थे, पर उनमें से एक फोटो ने सिमरन का ध्यान एकदम से अपनी ओर खींचा। वह दादाजी के दसवें जन्मदिन की फोटो थी, जिसमें दादाजी ने हाथ में गैस के गुब्बारे पकड़ रखे थे। सिमरन उस फोटो को देख कर अतीत की यादों में खो गयी। जब वह अपने दादाजी के साथ होती थी, वे उसे हमेशा एक बात कहते थे, “बेटा जब भी जीवन में कोई मुश्किल आये, तो निराश मत होना, हमेशा हँसकर उसका सामना करना। वह जरूर दूर हो जायेगी।” यह याद करते हुए सिमरन की आँखों में आँसू आ गये। उसने मन में इस बात को पक्का किया कि दादाजी की इस सीख़ को वह हमेशा याद रखेगी व अपने को कभी कमजोर नहीं महसूस करेगी। क्योंकि बड़ों का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है।

उसने सूटकेस को पहले की तरह कायदे से रखा और नये जोश के साथ अपनी परीक्षा की तैयारी करने के लिये बैठ गयी ।

शब्दार्थ:

  • अतीत – बीता हुआ समय
  • कायदे – तमीज़ से
आशीर्वाद
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