First published in November 2016 edition.

सुश्री निधि झा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से सामाजिक कार्य में मास्टर की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें विकास के मुद्दों में बच्चों के साथ काम करने का १२ साल से अधिक अनुभव है। उन्हें भारत और विदेश में किशोर बच्चों को परामर्श देने का लम्बा अनुभव है। उन्होने यूनाइटेड किंगडम में जरूरतमंद बच्चों के लिए सरकार के साथ काम किया है। वह बच्चों और किशोरों के लिए व्यक्तित्व वृद्धि कार्यशालाओं का आयोजन भी करती हैं।

अगर आप हमारे विशेषज्ञ से कोई सवाल पूछना चाहते हैं, तो हमें इस पते पर लिखिए: content@neevmagazine.co.in। प्रश्न पूछने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। 


प्रश्न:

मुझे इस साल बोर्ड की परीक्षा देनी है और उसके बाद विज्ञान, कला या वाणिज्य का चयन करना होगा। मैं उलझन में हूँ कि क्या लेना ठीक रहेगा। आम तौर पर विज्ञान के छात्रों को सबसे बुद्धिमान माना जाता है और मेरे माता-पिता भी मुझे विज्ञान लेने के लिए कह रहे हैं क्योंकि बोर्ड से अग्रिम परीक्षा में मेरे अच्छे नंबर आये थे। लेकिन कला, सामाजिक मीडिया, पत्रकारिता में मुझे बहुत दिलचस्पी है और मुझे लगता है कि मुझे कला के विषय लेने चाहिए। मैं क्या करूँ?

उत्तर:

आपकी उलझन स्वाभाविक है। हम सभी को इस चरण से गुजरना पड़ता है। कुछ निर्णय महत्वपूर्ण हैं लेकिन उन्हें लेना मुश्किल हो जाता है। अपने से बड़ों, जैसे कि माता-पिता या अंकल/आंटी की सलाह लीजिये। उनके पास अधिक अनुभव होता है और वे सही ढंग से आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
इसके अलावा, यह जानने की भी कोशिश करें कि विज्ञान या कला में आपको कौन कौन से विषयों का अध्ययन करना होगा और खुद जाँच करें कि आप उनको अच्छी तरह पढ़ने में सक्षम हो पायेंगे या नहीं। विषयों के चयन से अधिक महत्वपूर्ण है आपका चुने हुए विषयों में अच्छा प्रदर्शन। इसलिए आप जो भी विषय चुनें, आपका लक्ष्य होना चाहिए कि आप उनमें अच्छा प्रदर्शन करें।
तो, इसके बारे में सोचें। हालांकि आपने बताया है कि आपको कला की तरफ रुझान है, लेकिन अन्य विषयों पर भी एक नज़र डालें और देखें कि क्या इन विकल्पों में आपकी रूचि है।
आप किसी मनोवैज्ञानिक से भी मिल सकते हैं और एक योग्यता परीक्षा ले सकते हैं। इससे आपको अपनी सही क्षमता और योग्यता का निर्धारण करने में मदद मिलेगी। गूगल पर अपनी अभिक्षमता परीक्षा (aptitude tests) भी ली जा सकती है, जिससे आप स्वयं ही अपनी योग्यता का परीक्षण कर सकते हैं।
शुभकामनाएं!


प्रश्न:

में १२ साल का हूँ। मैं पिछले कुछ हफ्तों से बहुत चिड़चिड़ा हो गया हूँ। कल रात मैंने अपने छोटे भाई को थप्पड़ भी मारा क्योंकि वह मेरे कमरे में मेरी चीजों के साथ खेल रहा था। मैं बहुत बेचैन रहता हूँ और हर समय उलझन में रहता हूँ। मेरा मन करता है कि मैं किसी को मार दूँ या चीजों को तोड़ दूँ। पिछले ही हफ्ते मैंने गुस्से में खिड़की का शीशा तोड़ दिया था जिसके कारण मेरी माँ ने मुझे बहुत डांटा। मुझे पता नहीं कि मुझे क्या करना चाहिए। मुझे कोई नहीं समझता।

उत्तर:

मेरे प्यारे दोस्त,
तुम मन के उतार चढ़ाव से गुज़र रहे हो। भ्रम, चिड़चिड़ापन, क्रोध और हताशा का अनुभव करना इस उम्र के बच्चों के लिए बहुत आम बात है। आपका मस्तिष्क विकसित हो रहा है, आपके शरीर में हार्मोन बदल रहे हैं और आप विविध तरह के अनुभवों का सामना कर रहे हैं।
अतः आपको यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपको अपने मन के विचारों को नियंत्रित करने के प्रयास करने पड़ेंगे। जिससे आप अपने प्रियजनों को और स्वयं को नुकसान नहीं पहुँचाएं।
चिंता न करें, मन के विचारों में उतार चढ़ाव होना पूरी तरह से सामान्य है और बड़े होने का एक हिस्सा है। जब भी तुम्हें गुस्सा आ रहा हो या चिढ़ हो रही हो, तो नीचे दिए गए उपायों में से कोई उपाय करके देखें:
• डायरी लिखना शुरू करें। लिखना अपनी भावनाओं को निकालने का एक अच्छा तरीका है और एक बहुत अच्छी आदत भी। प्रत्येक दिन लिखें कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। लिखने से आप निश्चित रूप से शांत हो जाएंगे।
• जब भी मन अशांत हो, जॉगिंग के लिए बाहर चले जाएं। यह आपकी ऊर्जा को दिशा देने में मदद करेगी और आप हलके और ताजा भी महसूस करेंगे।
• अपना कोई विश्वसनीय ढूँढें – कोई दोस्त, माता-पिता, अंकल या कोई आंटी जिसे आप ऐसे समय पर अपना दिल खोल कर बता सकें। अपने मन की बात किसी को बोलना बहुत मददगार साबित होता है और आप अपने अनुभव से सीख सकते हैं।
याद रखें, मन के उतार चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकता है। आपको बस दृढ संकल्प की ज़रूरत है।
शुभकामनाएं!

अंग्रेज़ी में पढे

आपको क्या परेशानी है?
Rate this post

Leave a Reply

Loading...