आज की आधुनिक सिंड्रेला बुद्धिमान है। उसे सफल होने के लिए किसी राजकुमार की ज़रूरत नहीं।


“आज तो तुम गजब ढा रही हो”, रिनी ने कृति को छेड़ते हुए कहा।

“क्यों, क्या ज्यादा ही बदली लग रही हूं?” उसने उत्सुकता से पूछा।

“नहीं लेकिन, परिवर्तन गजब का है”, रिनी ने उसे गले लगाते हुए कहा।

“समय के साथ सभी में परिवर्तन आता है। मुझ में भी आ या है”, आंखें मटकाते हुए उसने गर्दन अकड़ा कर जवाब दिया।

“हां भाई! अमेरिका क्या रह आई हो, बिल्कुल बदल गई हो”, रिनी ने उसे फिर से छेड़ा।

दोनों सहेलियां जब सालों बाद मिली तो बातों का सिलसिला कुछ इतना चला कि एक बात ख़तम नहीं हो पाती थी, तब तक बीच में ही दूसरी शुरू हो जाती। वे दोनों कितनी देर से  रेस्टोरेंट में बैठी थी इसका भी उन्हें एहसास न रहा। वेटर ने जब सामने खड़े होकर अपनी उपस्थिति का भान कराया तो उन्होंने एक-एक कोल्ड कॉफी और कुछ स्नैक्स लाने का आर्डर और दे दिया। और फिर मशगूल हो गई अपनी बातों में।

कॉलेज के दिन कब पखेरू बन कर दूर चले गए, पता ही न चला। अब तो बस जॉब और मस्ती। साथ में एक अदद जीवनसाथी की खोज भी जारी है।

“और अब अगला कदम तो तेरा शादी का ही होगा?” कृति ने रिनी को आंखें झपकाते हुए पूछा।

“हां यार! मम्मी पापा भी परेशान हैं। लेकिन मुझे, मेरी चाहत के अनुसार कोई मिल ही नहीं रहा। तू सुना, कोई देखा क्या?” रिनी ने प्रश्न उस पर ही उछाल दिया।

“देख, अभी किसी को बताना मत। समय आने पर मैं ही सबको बता दूंगी”।

“अरे।।अरे।।मुझे तो जल्दी से बता दे!”

“देख भाई! हम ठहरे पक्के हिंदुस्तानी। तो अपने ही मुल्क का लड़का अमेरिका में भी ढूंढ लिया”।

“कैसा है!” रिनी ने उत्सुकता से पूछा।

कृति ने झट से अपने स्मार्टफोन में से उसे अचल की फोटो दिखा दी। एक नहीं, अनेक।

दोनों सहेलियां देर तक फोटो देखती रही। खिलखिलाती रही,  एक दूसरे को गले लगाती रही। शाम ढलते देख अगले दिन घर पर ही मिलने का प्लान बना कर चल पड़ी। कल शनिवार है, रिनी के ऑफिस की छुट्टी भी है। वह वूमेंस हॉस्टल में रहती है, तो वहां मिलने के समय की भी पाबंदी नहीं होगी।

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रिनी रात भर करवटें बदलती रही। वह कृति में आए परिवर्तनों को देखकर हैरान थी। कहां वह उसके साथ स्कूल में पढ़ने वाली साँवली लड़की, जो अपने काले तैलीय बाल कसकर बांधे रहती थी। लेकिन दिमाग की तेज थी। कुछ ही समय में उसकी बुद्धिमत्ता उसके रूप पर हावी हो गई। कक्षा की लड़कियां जो उसे देखकर मुस्कुराती थी, अब उसके सामने नजरें झुका लेती थी।

पहले धारणा थी कि लड़की सुंदर होनी चाहिए। चाहे वह बुद्धिमान हो या ना हो। ज्यादा पढ़ाई की भी आवश्यकता ना होती थी। सुंदरता ही एकमात्र सर्वोत्तम गुण होता था।

कृति को देखकर लगता ही नहीं कि कभी, उसे देखकर लोग हंसते भी थे। आज तो उसका रंग, रूप सब कुछ बदल गया है। नासा में कार्यरत अचल भी कितना सुदर्शन युवक है। उसने इसे कैसे पसंद कर लिया होगा, रिनी सोचती रही और पता नहीं कब उसकी आंख लग गई।

सुबह का शोरगुल सुनकर जब वह जगी तो अलसाई सी लेटी थी, कि उसे कृति से मिलने का ख्याल आया। वह शीघ्रता से उठ कर खड़ी हुई और अपने दैनिक कार्य में लग गई। लेकिन उसके दिमाग के घोड़े अभी भी बहुत तेजी से दौड़ रहे थे। वह  सोच रही थी – यह तो सच में सिंड्रेला की कहानी हो गई। यह तो साक्षात सिंड्रेला ही हो गई। इसे मनचाहा सब कुछ मिल गया। रूप भी, सौंदर्य भी, वेशभूषा भी और इतना सुंदर राजकुमार भी।

रिनी विचारों में गुम थी कि सामने कृति को देख कर उसके मुख से निकल गया, “आओ, सिंड्रेला आओ”।

“क्या कहा! सिंड्रेला! क्या मैं इतनी खूबसूरत और भाग्यशाली हूँ?” कृति ने उसे गले लगाते हुए उसकी आंखों में आंखें डाल कर पूछा। फिर खुद ही बुधबुदाई, “भाग्यशाली तो मैं हूँ, उसकी तरह”।

“सुंदर भी हो मेरी जान!” रिनी ने उसे प्यार करते हुए कहा। “सच! तू कितनी प्यारी लगने लगी है”, रिनी ने फिर कहा।

“नहीं! मैं प्यारी नहीं लगने लगी। लोगों का नजरिया बदल गया है। अब लोग सुंदरता पर नहीं, बुद्धि और विवेक पर ध्यान देने लगे हैं। अब मोम की गुड़िया कोई पसंद नहीं करता। लोग यथार्थवादी हो गए हैं। अब लोग शिक्षा, नौकरी, वेतन, रहन-सहन पर ध्यान दे देते हैं मेरी लाडो! अब तो परी कथाएं भी बदल गई हैं। राजा रानी के किस्से भी बदल गए हैं”।

“सच कह रही है। पहले परी कथाओं में सुंदर सा राजकुमार सफेद घोड़े पर सवार होकर आता था और राजकुमारी के सौंदर्य पर मोहित होकर, उसे अपने उड़ने वाले घोड़े पर सवार होकर, परी देश में ले जाता था”, दोनों खिलखिला कर हंस पड़ी। “आज परी देश बदल गया है। जादुई काल्पनिक दुनिया से वह यथार्थ की दुनिया में आ गया है। जहां शक्ल पर बुद्धि हावी है, जहां धन वैभव पर शालीनता और नम्रता हावी है, जहां सामाजिक स्थिति पर व्यवहार और चाल चलन हावी है। नेकनीयती, ईमानदारी, सच्चाई, सौम्यता पर सब कुछ निछावर है”।

“क्यों, तेरे इन्हीं गुणों पर तेरा राजकुमार अचल मोहित हो गया था?”

“तू सच कह रही है। उसका रूप, गुण देख कर मेरी तो हिम्मत भी नहीं हो रही थी उससे बात करने की। लेकिन उसने ही आगे बढ़ कर मुझसे बात की। जब वहां की यूनिवर्सिटी में उसने मेरा व्याख्यान सुना”।

रिनी उसकी आंखों में प्यार की चमक महसूस कर रही थी।

“इतनी खुश मत हो। तुम वह पहली लड़की नहीं हो जिसे ऐसा मनचाहा वर मिला है”, रिनी ने उसे चिढ़ाया।

“तो? और कौन है मुझसे आगे?”

“वह है ब्रिटिश की नई राजकुमारी मेगन। प्रिंस हैरी ने उससे विवाह करके यह दिखा दिया कि सच्चे इंसान की कीमत होती है, रूप, सौंदर्य और भव्यता कि नहीं। मेगन प्रिंस हैरी से उम्र में बड़ी है, तलाकशुदा भी है, सुंदरता में भी वह विशेष नहीं। लेकिन अपने पति के हृदय की वह अधिष्ठात्री हैं”।

“बस बस। मैं तो अपने आप को विशेष मान रही थी”, क्रोध दिखाते हुए कृति ने कहा।

“तुम तो मेरी आधुनिक सिंडरेला हो, कहीं की राजकुमारी नहीं”, रिनी ने उसे गले लगाया और दोनों खिलखिलाकर हंस पड़ी।

शब्दार्थ:

  • अधिष्ठात्री – हृदय में निवास करने वाली
  • व्याख्यान – लेक्चर
  • उत्सुकता – जिज्ञासा

नैतिक मूल्य:

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आधुनिक सिंड्रेला
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