सुगंधा की प्यारी सोच की वजह से वह ‘आधुनिक परी’ कहलाई।


६ साल की बिटिया, सुगंधा का जन्मदिन आनेवाला था। समय भी बरसात का था।

माँ ने पूछा, “जन्मदिन हेतु तुम वापसी तोहफा के रूप में क्या चाहती हो? टॉफ़ी, चॉकोलेट या कोई खिलौना, पुस्तक, आदि?”

सुगंधा बोली, “माँ, अब पांच वर्ष के बाद छटे वर्ष में मैं दूसरी श्रेणी में आ गई हूँ। हर बार हम भी यही तोहफे लाते हैं, जिनका इस्तेमाल मात्र कुछ देर में ख़त्म हो जाता है। अतः ऐसे तोहफे का कोई लाभ – न देने वाले को ना लेने वाले को। हमारे घर में कितने तुलसी, मनी प्लांट, मदर इन लॉ टंग प्लांट, आदि लगे हुए है। इस बार आप सबको ये छोटे पौधे दे दीजिये। हमारी सबसे प्यारी गुरु दीदी ने हमें बताया कि पौधे वातावरण सेहत के लिए उत्तम होते हैं। सभी को उनका ख़याल रखना चाहिए। बड़े पेड़ लगाने का, उसे संभालने का, हम जैसे छोटे बच्चों के पास मौक़ा नहीं होता।

Adhunik pari jaisi soch

अतः ये कार्य छोटे पौधे से शुरू करना चाहिए। एक बार उन्हें तोहफ़े के रूप में पौधा मिलेगा, साथ ही बताया जाएगा कि रोज़ नियम से पानी दो। खुली जगह में रखो, नियम से पौधे पर ध्यान दो आदि। तभी हम सबको पौधों की देखभाल की आदत पड़ेगी। अगर अच्छी तरह ख्याल रखा, तो ये वृद्धि और स्वम् द्विगुणित होंगे। अतः खुशी मिलेगी और चर्चा का विषय भी रहेगा। तभी लाभदायक तोहफा प्राप्त होगा। हमारे घर में स्वम् द्विगुणित होने से हर बार अतिरिक्त पौधों को हटाना पड़ता है”।

माँ ने पूरी बात सुन कर बेहद खुशी से कहा, “तुम उम्र के हिसाब से दूसरी श्रेणी में नहीं ‘आधुनिक परी’ की श्रेणी में लग रही हो! तोहफे की खुशी के साथ-साथ, अपने साथियों को सही मार्गज्ञान देने का बेहद उत्तम विचार प्रकट किया है”।

शब्दार्थ:

  • श्रेणी – स्तर
  • वृद्धि – विकास
  • द्विगुणित – एक से बढ़ कर कई

नैतिक मूल्य:

इस लेखक कि और रचनाएँ पढ़िये

आधुनिक परी जैसी सोच
Average rating of 4.5 from 2 votes

Leave a Reply

Loading...