आज फिर बारूदों के गोले और बंदूक़ों की आवाज़ आयी। हम सब हैरान और बेज़ुबान थे, ये क्या हुआ फिर से? समझ नहीं आता ऐसा क्यों करते है लोग? इंसान ही इंसान को मारकर, इंसानियत को कुचलता है। ऐ खुदा,…

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आतंक को जवाब
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