आज की बहादुर रेड राइडिंग हूड ने लोमड़ी को चकमा देना सीख लिया है।


बहुत दिनों के बाद, छोटी रेड राइडिंग हूड अपने नानी से मिलने जा रही थी। नानी के घर का रास्ता जंगल से हो कर निकलता था। इसीलिए मम्मी ने रेड को पहले ही सावधान कर दिया था, “रास्ते में कोई लोमड़ी मिल जाए तो डरना नहीं, होशियारी से काम लेना”।

रेड खुशी से नानी के घर की ओर निकल पड़ी। थोड़ी दूरी पर रुककर उसने नानी के लीए रंग-बिरंगे सुगंधित फूल तोड़े। पेड़ों से कुछ ताज़े फल भी तोड़ें। अचानक ही, पेड़ के पीछे से एक लोमड़ी निकल आया।

रेड घबरा गयी।

लेकिन लोमड़ी ने बड़े प्यार से पूछा, “अरे गुड़िया, आखिर इतने प्यारे भेंट लेकर किस्से मिलने जा रही हो?”

रेड ने जवाब दिया, “अपनी नानी से”।

Aaj ki choti Red Riding Hood

चालू लोमड़ी ने दया भरी आवाज़ में कहा, “अगर तुम मुझे नानी के घर का पता बताओ, तो मैं तुम्हें वहाँ तक जल्दी पहुँचने का कोई सहज रास्ता बता सकता हूँ”।

रेड ने ज़रा सोचा। फिर उसने लोमड़ी के कहने जैसा ही किया।

लेकिन लोमड़ी का इरादा कुछ और ही था। उसने रेड को कोई जटिल सा, लंबा रास्ता बताया। असल में वो खुद छोटे रास्ते के सहारे नानी के घर पहले पहुँचना चाहता था। पहले तो नानी को खाना चाहता था। उसके बाद नानी बन कर वह रेड को भी खा जाने का सपना देख रहा था।

कुछ ही देर बाद रेड अपनी नानी के घर पहुंची। फिर उसने नानी को पूरी घटना सुनाई।

आज की बहादुर रेड राइडिंग हूडदरअसल, उसने लोमड़ी को गलत पता बताया था। समझदार रेड को लोमड़ी की चालाकी पहले ही समझ आ गयी थी। उसे सबक सिखाने के लीए रेड ने उसे अपने बहादुर लकड़हारा मामाजी के घर का पता दे दिया था।

कुछ ही देर में मामा जी भी नानी के यहाँ पहुँचे। उन्होने रेड की बुद्धि त्तपरता की दाद दी। फिर उन्होने सुनाया कि कैसे बदमाश लोमड़ी को उन्होने कुल्हाड़ी के सहारे दे मारा। वो जान बचाते हुए घने जंगल में भागा! उसके बाद लोमड़ी कभी न दिखा।

शब्दार्थ:

  • जटिल – उलझा हुआ
  • लकड़हारा – लकड़ी काटकर बेचने वाला व्यक्ति
  • बुद्धि त्तपरता – उपस्थित बुद्धि

नैतिक मूल्य:

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