चंचलवन में फ़ैशन-शो की तैयारियाँ चल रही थी। सभी अपने कपड़े जग्गू भेड़िए से सिलवाने में लगे थे।

बड़की हथिनी तो डाइटिंग करके अपना वज़न कम कर रही थी। मयूरा मोरनी भी इसमें हिस्सा ले रही थी, लेकिन उसको सबसे ज़्यादा दुख मोर जैसे सुंदर पंख न होने का था। वह पूरे दिन चंचलवन में मोर के गिरे हुये पंखों को इकट्ठा करती रहती।

तेजी शेरनी के लिये तो जग्गू ने कपड़े से ही सुंदर सा गले का हार बना दिया था। धेनु गाय बहुत ही सीधी साधी थी, वह कुछ भी तैयारी नहीं कर रही थी, लेकिन बबली बकरी ने उसका नाम लिखा दिया था।

बबली को सजने सँवरने का बहुत शौक़ था। वह तो पता नहीं अपने लिये क्या-क्या खरीद रही थी, माथे का टीका, कानों के लिये लम्बे-लम्बे झाले और पैरों के लिये पायल। यह सभी दिन में कई बार समय मिलने पर रैम्प वॉक की प्रैक्टिस भी करते रहते।

स्टेज तैयार करने में लगे थे तोता, मैना, कोयल, चिड़िया वे अपनी चोंच में फूल पत्तियों को लाते और वहाँ पर मौजूद ख़रगोश, चूहा, बिल्ली आदि सभी स्टेज को सजाते। रंगबिरंगी तितलियों ने तय किया था कि जब शो शुरू होगा तो वे सभी स्टेज को और ख़ूबसूरत बनाने के लिये उसके आसपास ही उड़ेगी।

आख़िरकार वह समय आ ही गया और भाग लेने वाले सदस्य मेकअप रूम में तैयार होकर बैठ गये। शेर और चीता को जज बनाया गया। सबसे पहले मयूरा आती है, उसने मोर के पंखों को अपने पीछे चिपकाया होता है। वह अदाएं तो पूरी दिखाती है लेकिन जैसे ही मुड़ के जाने लगती है, उसके पंख गिर जाते है।

Albela fashion show

फिर तेजी शेरनी के आते ही सभी जानवर डर की वजह से पास आकर एक दूसरे को पकड़ लेते है। तेजी को यह देखकर ग़ुस्सा आ जाता है और वह बिना रैम्प वॉक किये ग़ुस्से से वापस चली जाती है।

फिर आती है चटको मटको बबली की बारी, वह बड़ी मटक-मटक कर स्टेज पर चलती है, लेकिन उसने कुछ ज़्यादा ही गहने पहने होते जो जजों को पसंद नहीं आते।

धेनु के आते ही सभी तालियाँ बजाते है क्योंकि वह बहुत अच्छी लग रही थी, गले में घंटी बाँधी हुयी थी और सींगों को इन्द्रधनुषी रंगों से रंगा हुआ था।

फिर बड़की हथिनी ज़ोरों शोरों से आयी और जैसे ही स्टेज पर अपना पहला कदम रखा, स्टेज ही टूट गया। यह देखकर वहाँ बैठे हुये लोगों का हंस-हंस के बुरा हाल हो गया। लेकिन एक बात अच्छी थी कि बड़की को चोट नहीं लगी। वह गिरने के बाद भी उठी और उसने अपनी रैम्प वॉक पूरी की।

अब समय था पुरस्कार मिलने का। पहला पुरस्कार धेनु गाय को उसकी सादगी की वजह से मिला। दूसरा पुरस्कार बड़की को मिला जिसने गिरने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। सारे जज ने तीसरे स्थान पर मयूरा, तेजी और बबली को रखा क्योंकि उन सभी ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ फ़ैशन शो में भाग लिया। जग्गू को भी नए डिज़ाइन के कपड़े बनाने के लिये पुरस्कार मिला।

तितलियाँ भी अभी तक स्टेज के आसपास उड़ कर सभी की ख़ुशियों मे शामिल हो रही थी।

शब्दार्थ:

  • अलबेला – अनोखा
  • सादगी – भोलापन, सरलता
अलबेला फ़ैशन-शो
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