छोटी प्रीति खाना खाने में अक्सर नखरे दिखाया करती थी। दूध देखते ही उसका दिल मिचलाने लगता था, रोटी देखते ही उसकी भूख खतम हो जाती थी और फलों के नाम पर वह नाक, भों सिकोड़ने लगती थी। प्रीति के माता–पिता इस बात से बहुत परेशान और दुखी रहते थे। वे उसे बार–बार समझाते की अच्छा खाना हर किसी को नहीं मिलता, दुनिया भर में न जाने कितने लोगों को बिना खाना खाए सोना पड़ता है। प्रीति पर इन बातों का कोई असर न होता।

एक दिन प्रीति खाना न खा कर, घर की खिड़की से सड़क पर आने–जाने वालों को देख रही थी। उसकी नजर सड़क के किनारे पड़े कूड़े की ओर गई, वहाँ एक छोटा बच्चा कूड़े में कुछ ढूंढ रहा था। उसने देखा की वह बच्चा पोलिथीन उठा कर अपने बैग में रख लेता, कभी–कभी कुछ उठा कर मुंह में डाल लेता। प्रीति घबरा गई कि उसकी माँ तो उसे साफ जगह में गिरी टौफ़ी भी नहीं खाने देती, वह बच्चा वहाँ इतनी गंदगी में से क्या उठा कर खा रहा होगा? उसने माँ को आवाज दी और उस बच्चे को दिखाया और पूछा कि वह गंदगी में से कुछ उठा कर क्यों खा रहा है? माँ ने बताया कि वह भूखा है इसलिए खा रहा है। भूखा व्यक्ति अपनी भूख मिटाने के लिए कुछ भी खाने के लिए मजबूर हो जाता है। भूख लगने पर पेट में और सिर में दर्द होने लगता है, वह बच्चा अपनी भूख मिटाने का प्रयत्न कर रहा है।

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माँ ने बताया भोजन को कभी प्लेट में नहीं छोड़ना चाहिए जिससे अन्न की बचत होगी, तो सभी को खाने के लिए मिल सकेगा। प्रीति को उस बच्चे पर दया आई, वह उसे बुलाने दौड़ गई। उस बच्चे को खाना खिलाया फिर स्वयं खाना खाया। आज उसे खाना स्वादिष्ट लगा जो पहले कभी नहीं लगा था। प्लेट में उसने कुछ छोड़ा भी नहीं। माँ ने उसे प्यार किया और बताया कि बच्चों को स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए समय पर और शुद्ध खाना खाना चाहिए जिससे कुपोषण न हो।

“कुपोषण क्या होता है माँ?”

“कुपोषण का मतलब है, ऐसा खाना खाना जो शरीर के लिए उपयुक्त न हो”।

“लोग ऐसा भोजन क्यों खाते हैं?”

“क्योंकि उन्हे भर पेट खाना नहीं मिलता।”

“क्यों नहीं मिलता?”

“क्योंकि अन्न की कमी है। जनसंख्या अधिक है, अन्न कम। अमीर लोग अन्न की बरबादी करते हैं और बच्चे भी। वे प्लेटों में अधिक खाना डालते हैं और बर्बाद करते हैं। अन्न की बरबादी नहीं करनी चाहिए, उसका सम्मान करना चाहिए और अन्न उगाने वाले किसान का भी। वे हमे अन्न देते हैं, वे अन्नदाता हैं। भूख लगने पर लोग धन–दौलत नहीं खा सकते, पेट के लिए अन्न ही चाहिए। देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह किसानों की सहायता करे और सम्मान करे, उन्हें हेय दृष्टि से न देखें। हमारे देश में अनेक किसान गरीबी के कारण आत्महत्या कर लेते हैं। सरकार और जनता दोनों को प्रयत्न करके इस समस्या का समाधान करना चाहिए। हमे किसानों की हालत में सुधार लाना होगा क्योंकि जब अन्नदाता ही नहीं होगा तो पोषण कैसे होगा। किसानों को वर्ष भर कठिन परिश्रम करना पड़ता है, जिससे हम सब भूखे न रहें। हमें अन्न देव और अन्न दाता दोनों के महत्व को समझना चाहिए जिससे हम स्वस्थ रहें।

शब्दार्थ

  • हेय – निम्न स्तर
  • दौलत – धन
  • अन्न दाता – किसान
अन्न देव
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