अंकित ने दूर से देखा कि राजन रेसिंग ग्राउंड में बड़ी तेजी से दौड़ रहा था। फिनीश लाइन के पास पहुंचकर वह रुक गया और पीछे मुड़कर देखने लगा। फिर वह परेशान हो कर इधर-उधर किसी को ढूंढने लगा। अंकित को माजरा कुछ समझ नहीं आया। राजन किस से रेस करके इतनी तेजी से दौड़ रहा था, क्योंकि ग्राउंड में वह तो अकेला ही था। और अब पता नहीं किसे ढूँढ रहा है। राजन अंकित का बहुत प्यारा मित्र था। दोनों दोस्त साथ में पढ़ते और खेलते थे। अंकित तुरंत राजन की मदद के लिए उसकी तरफ चल पड़ा।

“अरे राजन! ये तुम इधर-उधर किसे ढूँढ रहे हो?”

“क्या बताऊँ, एक लड़का मेरे हाथ से चाकलेट छीन कर भाग गया”, राजन ने उदास हो कर कहा।

Anadi khiladi

“तो तुमने उसे पकड़ा नहीं? तुम तो अच्छे खिलाड़ी हो। पिछले महीने दौड़ की रेस में तुम ही तो प्रथम आये थे”, अंकित ने आश्चर्य से पूछा।

“हाँ, मैं उसके पीछे भागा था। मैं बहुत तेज दौड़ कर रेस में उससे आगे निकल गया। फिर जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह गायब हो गया था”।

अंकित यह सुनकर हंसने लगा, “अरे अनाड़ी! तुम्हें उस शैतान लड़के को पकड़ना था, उससे रेस थोड़े ही न जीतनी थी।“

राजन भी अब मुस्कराने लगा, “मैं तेज दौड़ने के चक्कर में यह भूल ही गया था”।

“तो अब अपनी चाकलेट को भी भूल जाओ। चलो चल कर झूला झूलते हैं”, अंकित ने राजन का हाथ पकड़ कर कहा। फिर दोनों दोस्त हँसते हुए झूले की ओर चल पड़े।

शब्दार्थ:

  • माजरा – घटना
  • आश्चर्य – हैरानी
  • अनाड़ी – नासमझ
अनाड़ी खिलाड़ी
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